(तौकीर आलम पत्रकार)दरगाह साबिर पाक में कथित अवैध उगाही पर कर्मचारी निलंबित, तीन सदस्यीय जांच समिति गठित
पूर्व में गठित समिति से जुड़े आरोपों की जांच पूरी होने तक कथित मुख्य भूमिका वाले व्यक्ति को भी दरगाह से हटाने की उठी मांग

पिरान कलियर। दरगाह साबिर पाक में ठेकों के नाम पर कथित अवैध उगाही के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए दरगाह के कर्मचारी/सेवक सलीम अहमद उर्फ बिल्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की दीपक रामचंद्र शेट ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की ओर से जारी आदेश के अनुसार, दरगाह कार्यालय को कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग प्राप्त हुई थीं, जिनमें एक कर्मचारी/सेवक द्वारा ठेकों के नाम पर कथित रूप से अवैध वसूली किए जाने की बात सामने आई। प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद सलीम अहमद उर्फ बिल्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित कर्मचारी की गतिविधियों से दरगाह की छवि प्रभावित हुई है। उनके खिलाफ पूर्व में भी गोपनीय सूचनाएं बाहर देने, दान रसीदों में अनियमितता सहित अन्य शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। इन मामलों में पूर्व में उन्हें निलंबित किया गया था, लेकिन बाद में चेतावनी देकर बहाल कर दिया गया था।
प्रशासन के अनुसार, कर्मचारी के व्यवहार में अपेक्षित सुधार नहीं आने तथा दरगाह के नाम पर कथित रूप से कर्मचारियों की समिति/कमेटी बनाए जाने के मामले को भी गंभीरता से लिया गया है। इस संबंध में उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था, जिसे संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई। मामले की जांच अब तहसीलदार रुड़की के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय समिति करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब बड़ा सवाल—कथित मुख्य भूमिका वाले व्यक्ति पर कार्रवाई कब?
सलीम अहमद उर्फ बिल्ला के निलंबन के बाद दरगाह से जुड़े लोगों और स्थानीय नागरिकों के बीच पहले से चल रही एक अन्य जांच को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का आरोप है कि दरगाह के नाम पर कथित रूप से एक समिति गठित किए जाने और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच पहले से चल रही है। इस मामले में तीन लोगों की भूमिका जांच के दायरे में बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एक कर्मचारी के खिलाफ कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच पूरी होने तक उसे दरगाह से दूर रखा जा सकता है, तो पहले से जांच के दायरे में चल रहे कथित समिति प्रकरण में भी समान प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
लोगों ने मांग की है कि जिस व्यक्ति पर कथित रूप से इस समिति में मुख्य भूमिका निभाने, दरगाह के नाम पर पुस्तकें प्रकाशित करवाकर बेचने तथा समिति के माध्यम से लाखों रुपये के कथित वित्तीय घोटाले से जुड़े आरोप लगाए जा रहे हैं, उसे भी जांच पूरी होने तक तत्काल दरगाह की व्यवस्थाओं और कार्यालयीय गतिविधियों से अलग किया जाए।
स्थानीय लोगों का तर्क है कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक जांच के दायरे में आने वाले किसी भी व्यक्ति को दरगाह की व्यवस्थाओं में सक्रिय रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि इससे जांच की निष्पक्षता प्रभावित होने या साक्ष्यों एवं दस्तावेजों से छेड़छाड़ की आशंका पैदा हो सकती है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
लोगों ने दरगाह के नाम से प्रकाशित कराई गई पुस्तकों, उनकी बिक्री से प्राप्त धनराशि, कथित समिति के गठन, उसके बैंक खातों अथवा वित्तीय लेनदेन और अन्य संबंधित मामलों की भी निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराने की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जांच में किसी भी व्यक्ति की भूमिका या वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है तो उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही दोष सिद्ध होने पर मुकदमा दर्ज कर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
अब निगाहें तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक कर्मचारी को निलंबित किए जाने के बाद दरगाह के नाम पर कथित समिति, पुस्तकों की बिक्री और लाखों रुपये के कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़े आरोपों की जांच में सामने आ रहे अन्य लोगों पर प्रशासन कब और क्या कार्रवाई करता है।
डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ, वेब डेवलपर और जनवाणी एक्सप्रेस के मुख्य संपादक। पिछले कई वर्षों से उत्तराखंड और राष्ट्रीय स्तर पर निष्पक्ष पत्रकारिता और डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
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